राज्य स्तरीय कार्यशाला में मनोचिकित्सकेां ने जानी रिकवरी तकनीक

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मानसिक बीमारी से ग्रस्त लोगों के स्वास्थ्य लाभ और पुनर्वास की आवश्यकताओं को समझने और ऐसी सेवाएं प्रदान करने की योजना विकसित करने के लिए हरियाणा के 15 जिलों के सरकारी अस्पताल के मनोचिकित्सकों और नैदानिक मनोवैज्ञानिकोंका गुरुग्राम के संबंध हेल्थ फाउंडेशन (एसएचएफ) में एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें सभी मनोचिकित्सकेंा को मनोरोग के उपचार में काम आ रही रिकवरी तकनीकी की जानकारी दी गई।

कार्यशाला की शुरूआत हरियाणा सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं की निदेशक डॉ वीणा सिंह ने की।  डा. वीणा का विजन है कि हरियाणा में ऐसी सेवाएं प्रदान की जाएं। कार्यशाला का आयोजन संबंध हेलथ फाउंडेशन (एसएचएफ) द्वारा गुरुग्राम सेक्टर 31 में पॉलीक्लिनिक मेंकिया गया।  वर्ष 2014 से एसएचएफ  और हरियाणा सरकार के  बीच एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए हैं।  इस एमओयू के अनुसार एसएचएफ स्किजोफ्रेनिया और द्वि-ध्रुवीय गंभीर मानसिक बीमारी वाले लोगों के लिए विभिन्न रिकवरी सेवाएं चला रहा है। हरियाणाशायद कुछ राज्यों में से एक है जो इस तरह की सामुदाय-आधारित सेवाओं का संचालन करता है।

डॉ. सिंह ने कहा कि अनुमान है कि  भारतीय आबादी का 1.9 प्रतिशत (राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण – 2016, निमहंस) से अधिक लोग अपने जीवनकाल में गंभीर मानसिक विकार से पीड़ित हैं। हरियाणा में 5 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित होते हैं। उन्होंने कहा किमस्तिष्क, रसायनिक परिवर्तनों के कारण, ये बीमारियां लोगों के व्यवहार में प्रकट हेाती हैं और इसलिए इन्हें पहचानने में काफी समय लगता है। समाज में मानसिक बीमारी को कलंक माना जाता है। इसे बीमारी के रूप में न देख कर बुरे व्यवहार, खराब लालन-पालन  याचरित्र की कमजोरी के रूप में देखा जाता है जिससे लोग इलाज के लिए आगे नहीं आते। समाज की पुरानी रुढ़वादी परंपरा वाली सोच लोगों को इलाज कराने से रोकती है। एक बार इलाज शुरू करने के बाद, दवा, लोगों को उनकी स्थिति को स्थिर करने में मदद करती है। लेकिनतब तक मानसिक बीमारी से पीड़ित व्यक्ति कई वर्षों तक समाज से अलग रह चुके होते हैं और अपने घरों और समुदाय के हिस्से के रूप में कार्य करने की अपनी क्षमता खो चुके होते हैं। पीड़ितों को परिवार और देखभाल करने वालों को व्यवहार में बदलावों का सामना करनामुश्किल लगता है और उन्हें अपने आप को समाज से अलग करना पड़ता है। कई लोगों को जीवनभर ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ता है, जो उनके प्रियजनों की देखभाल करते हैं उन्हें शारीरिक, भावनात्मक, वित्तीय और सामाजिक जरूरतों का सामना करना पड़ता है।

स्वास्थ्य सेवाओं की निदेशक ने कहा कि एमएच अधिनियम की धारा 18 (5) (1) के अनुसार हम प्राथमिक स्वास्थ्य, माध्यमिक और तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल सहित सभी स्तरों पर सामान्य स्वास्थ्य सेवा सेवाओं में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को एकीकृत करेंगे। उन्होंनेकहा कि एमएच अधिनियम की धारा 18 (5) (डी) के अनुसार, हरियाणा सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि मानसिक बीमारी वाले किसी भी व्यक्ति को मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करने की आवश्यकता न हो।

मरीजों और परिवारों को समुदाय के साथ एकीकृत करने में मदद करने के लिए पुनर्वास या स्वास्थ्य लाभ सेवाएं और देखभाल करने वाले की सहायता की आवश्यकता होती है। डॉ सिंह ने कहा कि एसएचएफ के साथ हरियाणा के तीन साल के पायलट योजना  सफल रही हैऔर हमने कनाडा में एक बहुत ही सफल मॉडल से प्राप्त जानकारियों का उपयोग किया है – जो उन्नत मानसिक स्वास्थ्य प्रणालियों के लिए जाना जाता है। अब हम हरियाणा के सभी जिलों में इसे सीखने पर काम कर रहे हैं।

गुरुग्राम सिविल अस्पताल पीएमओ डॉ. ब्रह्मदीप सिंधु ने बताया कि एसएचएफ में उनके और उनके बीच की साझेदारी ने बड़ी संख्या में मरीजों को लाभान्वित किया है। उन्होंने कहा कि एसएचएफ ने गुरुग्राम के गुड़गांव गांव, बसई, गांधीनगर और झाड़सा के चार गांवों मेंसेवाओं का विस्तार किया था और इससे मदद मांगने वालों की दर में वृद्धि हुई है।

एसएचएफ में मानसिक स्वास्थ्य प्रमुख रीता सेठ ने मानसिक रोगियेां के लिए एसएचएफ में उपयोग की जाने वाली पद्धतियों और मानसिक मरीजों के स्वास्थ्य  लाभ  की कहानी,  परिवारों और ऐसी परिस्थितियों में मरीजों की देखभाल करने वालों और उनकी मदद करनेवालों के साथ साझा किया। जैसा कि उसने कहा, मानसिक बीमारी कोई विकल्प नहीं है, लेकिन स्वास्थ्य लाभ ही इसका विकल्प है।

हरियाणा के मानसिक स्वास्थ्य रेाग विभाग के अतिरिक्त निदेशक डा. विश्वनीत सिंह ने बताया कि मानसिक हेल्थकेयर अधिनियम, 2017 के तहत यह अनिवार्य है कि राज्य मानसिक बीमारी और उनके परिवारों के साथ रहने वाले लोगों के लिए समुदाय आधारित सेवाएंप्रदान करेगा। एमएच अधिनियम की धारा 18 (4) (सी) के अनुसार हरियाणा सरकार की और से सेक्टर 31 में ऐसे परिवारेा के सदस्यों के लिए देखभाल करने वालों को घर आधारित पुनर्वास (आउटरीच सेवाओं) के लिए समर्थन प्रदान किया है। उन्होंने पुनर्वास सेवाएं भी प्रदानकी हैं जो एमएच अधिनियम की धारा 18 (5) (बी) के अनुसार समुदाय में और उनके परिवारों के साथ मानसिक बीमारी वाले व्यक्तियों का समर्थन करती हैं।

एसएचएफ ने एमएच अधिनियम की धारा 18 (4) (बी) के अनुसार एक आश्रय आवास की भी सथापना की है और हरियाणा सरकार इस शिक्षा को राज्य के अन्य हिस्सों में ले जाएगी इस अवसर पर मानसिक बीमारी और दो देखभाल करने वालों के दो व्यक्तियों ने अपने अनुभवों को कार्यशाला में साझा किया। उन्होंने बताया कि एसएचएफ में स्वास्थ्य लाभ सेवा लेना शुरू होने से पहले उनकी जिंदगी कितनी निराशाजनक लग रही थी उन्होंने दोहराया किइन सेवाओं का लाभ उठाने के बाद से उनके जीवन में सुधार हुआ है। फैमिली सेल्फ हेल्प ग्रुप मीटिंग में एक परिवार के सदस्य ने कहा, मैंने माता-पिता होने का चयन किया था, लेकिन देखभाल करने वाला नहीं था। यह भूमिका मुझ पर थोपी गई थी।

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