कांग्रेस की नगर निगम चुनाव की सियासत से सिद्धू को दूर रखने की रणनीति

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PBK NEWS | चंडीगढ़ । कांग्रेस को राज्‍य में स्‍थानीय निकाय चुनाव में जीत का पूरा भरोसा है। इसके साथ ही वह नवजोत सिंह सिद्धू को इसका सेहरा नहीं देना चाहती है। इसी कारण कांग्रेस सिद्धू को इस चुनाव से दूर रखना चाहती है। पार्टी जालंधर, अमृतसर व पटियाला नगर निगमों व अन्‍य नगर परिषदों के चुनाव प्रचार से सिद्धू को दूर रखने की कवायद में जुटी है।

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नतीजतन, फायर ब्रांड सेलिब्रिटी नेता के रूप में अपनी पहचान रखने वाले सिद्धू भी चुनाव प्रचार में पूरी तरह से सक्रिय नहीं हैं। कांग्रेस की सियासी कूटनीति है कि चुनाव हारे, तो ठीकरा सिद्धू के सिर पर फोड़ा जा सकता है और जीते, तो सेहरा पार्टी के सिर बंधेगा।

पार्टी की सियासी कूटनीति के चलते सारी जिम्मेदारी विधायकों पर

तीनों नगर निगमों के चुनाव सितंबर में होने थे, लेकिन कांग्रेस विधायकों की राय पर नवजोत सिंह सिद्धू के मुहर लगाने के बाद पार्टी ने चुनाव को लेकर टाल दिया था। इसके बाद गुरदासपुर लोकसभा उपचुनाव के बाद कांग्रेस ने निगमों व कौंसिलों के चुनाव करवाने की रणनीति तय की। सिद्धू की भी कोशिश थी कि पहले वह स्थानीय निकाय विभाग में तमाम संभावित सुधार कर लें और लोगों के सामने उपलब्धियां गिनाने लायक हो जाएं, तो चुनाव करवाएं जाएं।

अकाली-भाजपा सरकार के बीते दस साल के कार्यकाल में बनी हजारों करोड़ खर्च करके बनीं सड़कें, पेयजल सप्लाई व सीवरेज की सुविधा से लोग संतुष्ट नहीं हैं। यही वजह है कि निगम चुनाव में अभी तक स्थानीय स्तर पर सड़क, सीवरेज व सेनिटेशन व पेयजल सप्लाई जैसे बुनियादी मुद्दे ही अपनी जगह बना पाए हैं।

नौ माह में नगर निगमों में ऑनलाइन इमारतों के नक्शे पास करने से लेकर सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, स्ट्रीट लाइट व लोगों की समस्याएं व शिकायतें सुनने व उन्हें दूर करने के लिए सिद्धू की तरफ से किए गए प्रयासों के साथ-साथ उन्होंने अगले चार सालों का विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया था। इसके आधार पर ही वोट मांगे जाएंगे। विजन डॉक्यूमेंट तैयार हो गया, लेकिन उसे लोगों के बीच में सिद्धू को लेकर जाने देने की बजाय कांग्रेस ने विधायकों के जरिए पेश करवाया जा रहा है।

विधायकों को बोला है जहां जरूरत हो जरूर बुलाएं: जाखड़

पंजाब कांग्रेस कमेटी के प्रधान सुनील जाखड़ का कहना है कि निगम चुनाव प्रचार को लेकर कांग्रेसी विधायकों के हाथों में ही कमान सौंपी गई है। चूंकि यह चुनाव पर्सनल कनेक्ट से जुड़े होते हैं और तीनों शहरों व कौंसिलों में कांग्रेसी विधायक अपने-अपने हलकों में कांग्रेसी उम्मीदवारों को लेकर जवाबदेह होंगे। इसलिए हो सकता है कि सिद्धू का पूरा इस्तेमाल न किया जा रहा हो।

सिद्धू ने चुनाव को लेकर अपना विजन मुख्यमंत्री के साथ शेयर कर लिया था। उसके बाद कांग्रेसी विधायकों के साथ हुई बैठक में विधायकों को सिद्धू के विजन के बारे में भी विस्तार से जानकरी दे दी गई है। जाखड़ यह भी स्वीकार करते हैं कि सिद्धू चुनाव प्रचार में पूरे जोर-शोर के कूदते तो कांग्रेस को शायद ज्यादा लाभ हो सकता था, लेकिन कांग्रेसी विधायकों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें भी मौका मिलना चाहिए। विधायक पूरी तरह से सक्षम हैं। वैसे प्रचार को लेकर किसी को रोका नहीं गया है। सभी विधायकों को कहा गया है कि जहां भी उन्हें जरूरत पड़े व कैप्टन या सिद्धू को बुला सकते हैं।

सिद्धू को प्रचार से दूर रखने के पीछे कारण

-कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद से ही सिद्धू ने अकालियों पर सियासी हमला करने का एक भी मौका नहीं छोड़ा है। इस बार कांग्रेस की रणनीति है कि वह अपने एजेंडे पर निगम व कौंसिलों के चुनाव लड़े। अकालियों पर सियासी हमले करके कांग्रेस किसी मुद्दे में उलझना नहीं चाहती है।

-जनसभा को संबोधित करते समय सिद्धू कई बार जरूरत से ज्यादा आक्रामक हो जाते हैं और जुमलों के रूप में विरोधी दलों व नेताओं की पोल खोल जाते हैं। कांग्रेस नहीं चाहती की वह किसी ऐसे मुद्दे में उलझे।

-विजन डॉक्यूमेंट को अगर सिद्धू लोगों के बीच में लेकर जाते, तो हार या जीत का सेहरा भी सिद्धू के सिर पर बंधता और उनकी लोकल कनेक्टिविटी ज्यादा बढ़ती। कांग्रेस फिलहाल ऐसा नहीं चाहती।

News Source: jagran.com

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