गुड़गाँव 30 जून (अजय) : CBSE के 10वीं बोर्ड के नतीजे आ चुके है। इनमें 1,31,493 स्टूडेंट्स को 90% से ज्यादा तो 27,476 स्टूडेंट्स को 95% से ज्यादा मार्क्स आए हैं। वहीं, रिजल्ट के तुरंत बाद उम्मीद से कम नंबर आने पर तीन बच्चों ने सुसाइड कर लिया था। आखिर सीबीएसई की एग्जाम में स्टूडेंट्स को इतने नंबर क्यों मिल रहे हैं ? और नंबरों की इस अंधी दौड़ ने क्या बच्चों और पैरेंट्स पर एक्स्ट्रा प्रेशर नहीं डाल दिया ? नंबरों की इस मार-काट वाली प्रतिस्पर्धा ने हमारे पूरे एजुकेशन सिस्टम पर ही सवाल खड़े कर दिए है। इस सवाल को लेकर सीबीएसई के पूर्व चेयरमैन अशोक गांगुली, एनसीईआरटी के पूर्व डायरेक्टर व शिक्षाविद् जेएस राजपूत, सीबीएसई में काउंसलर एंड साइकोलॉजिस्ट डॉ. शिखा रस्तोगी और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अन्य जानकार लोगों और टीचर्स से।सीबीएसई के पूर्व चेयरमैन अशोक गांगुली कहते हैं कि नंबरों की यह दौड़ चिंताजनक है। बच्चों पर प्रीमियम परफॉर्मेंस के लिए जोर दिया जा रहा है। इससे न केवल बच्चों और पैरेंट्स पर प्रेशर बढ़ेगा, बल्कि जिन बच्चों के ज्यादा नंबर नहीं आएंगे या 70-75 फीसदी मार्क्स लाने वाले बच्चे अपने फ्यूचर को लेकर दुविधा में आ जाएंगे।
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