गुडगाँव, 4 जनवरी (ब्यूरो) : तमाम दावों और कार्य योजना बनाने के बाद भी दिल्ली में वायु प्रदूषण की स्थिति नहीं सुधर रही है। नए वर्ष में भी यहां की हवा जहरीली बनी हुई है। इस स्थिति के लिए कहीं न कहीं दिल्ली सरकार जिम्मेदार है। सरकार यदि ईमानदारी से काम करती तो दिल्ली की आबोहवा इतनी नहीं बिगड़ती, लेकिन इसे लेकर वह गंभीर नहीं है। पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) द्वारा वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए बनाई गई कार्य योजना को भी ठीक से लागू नहीं किया गया। यही वजह रही कि ईपीसीए के चेयरमैन व सदस्यों की सक्रियता के बावजूद प्रदूषण से जंग में दिल्ली विफल साबित हुई। ईपीसीए चेयरमैन और इसके सदस्यों ने भी दिल्ली सरकार से सहयोग न मिलने का आरोप लगा चुके हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) का भी आरोप है कि सरकार वायु प्रदूषण को लेकर गंभीर नहीं है। उसकी 40 टीमें गत सितंबर से दिल्ली के विभिन्न इलाकों की रिपोर्ट भेज रही है। इसके बावजूद दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) वायु प्रदूषण को नियंत्रण करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। बार-बार चेतावनी के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं होते देख सीपीसीबी ने उपराज्यपाल से शिकायत करने का फैसला किया है। नवंबर महीने में कई दिनों तक दिल्ली गैस चैंबर बना रहा था। फिरोजशाह कोटला स्टेडियम में आयोजित टेस्ट मैच में श्रीलंका के खिलाड़ियों ने मास्क पहनकर मैदान में उतरे थे जिससे पूरे विश्व में दिल्ली की बदनामी हुई थी।
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