गुड़गांव, 14 जून (अजय) : बाल श्रम के खिलाफ विभिन्न संगठन एकजुट होकर श्रमविभाग के खिलाफ विशेष अभियान छेड़ रहे है तो वही नवजन चेतना मंच के संयोजक वशिष्ठ कुमार गोयल ने बोलते हुए कहा कि सरकार व् श्रमविभाग गुडगाव में होने वाली बाल मजदूरी के प्रति गम्भीर नही है जिसके चलते राईट टू एजुकेशन के तहत हर बच्चे को मुफ्त शिक्षा की योजना केवल जुमला शाबित हो रही है उन्होंने बताया कि बाल मजदूरी बहुत बड़ी समस्या है। खेलने और पढ़ने की उम्र में बच्चों से बाल मजदूरी करवाई जाती है। देश में 1986 में बाल श्रम निषेध नियमन अधिनियम पारित हुआ। इस अधिनियम के अनुसार बाल श्रम तकनीकी सलाहकार समिति नियुक्त की गई। समिति की सिफारिश के अनुसार खतरनाक उद्योगों में बाल श्रमिकों का कार्य करना निषेध माना गया है। किसी भी काम के लिए 14 साल से कम उम्र के बच्चे को नियुक्त करने वाले व्यक्ति को दो साल तक की कैद तथा उस पर अधिकतम 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाने का प्रावधान है। दूसरी बार अपराध में संलिप्त पाए जाने पर नियोक्ता को एक साल से लेकर 3 साल तक की कैद की सजा का प्रावधान किया गया है। जिसके बाद भी बालश्रम को रोकने के लिए श्रम विभाग गम्भीर नही है और गुड़गांव में जगह जगह हो रही बाल मजदूरी पर चुप्पी साधे हुए है।
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