PBK NEWS | नई दिल्ली । नोटबंदी के बाद दिल्ली के एक बैंक में जमा कराए गए करीब 16 करोड़ रुपयों को विशेष अदालत ने ‘बेनामी’ संपत्ति घोषित कर दिया है। इस रकम के जमाकर्ता और लाभार्थी का पता नहीं लगाया जा सका। नए कानून के तहत बेनामी जमा घोषित किए जाने के कुछ शुरुआती मामलों में से यह एक है।
यह मामला रमेश चंद शर्मा नामक व्यक्ति से जुड़ा है। वह कथित रूप से पुरानी दिल्ली के नया बाजार इलाके के गली लालटेन का रहना वाला है। नोटबंदी के बाद पिछले साल दिसंबर में आयकर विभाग ने कालेधन के खिलाफ एक अभियान चलाया था।
इसके तहत कोटक महिंद्रा बैंक की केजी मार्ग स्थित शाखा पर विभाग ने एक सर्वे किया था। इसमें पता चला कि रमेश चंद शर्मा ने पुरानी करेंसी में 15,93,39,136 रुपये तीन फर्मों के खातों में जमा कराए थे। विभाग को इनके फर्जी होने का संदेह हुआ।
आयकर अधिकारियों को यह भी पता चला कि नकद जमा कराए जाने के तुरंत बाद अज्ञात लोगों के एक समूह को इस रकम के डिमांड ड्राफ्ट जारी किए गए थे। विभाग ने इन डिमांड ड्राफ्ट्स को फ्रीज कर दिया और इस रकम को बेनामी बताते हुए जब्त कर लिया।
इसके बाद नए बेनामी लेनदेन (निषेध) संशोधन अधिनियम-2016 के प्रावधानों के मुताबिक विभाग ने एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी से इसका मंजूरी आदेश हासिल कर लिया। इसके मुताबिक, कई समन भेजे जाने के बावजूद रमेश चंद शर्मा जांच अधिकारी और एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी के समक्ष पेश नहीं हुआ।
आयकर विभाग के आरोपपत्र के मुताबिक, रमेश चंद शर्मा ने किसी भी समन का जवाब तक नहीं दिया। बैंक में उसकी ओर से दाखिल केवाईसी दस्तावेजों में दिए गए पते पर भी उस नाम का कोई व्यक्ति नहीं रहता है और न ही कभी रहता था।
बता दें कि पिछले महीने तक के आंकड़ों के मुताबिक नए बेनामी कानून के तहत आयकर विभाग ने अब तक 1,833 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है। नए कानून में दोषी को अधिकतम सात वर्ष की जेल और जुर्माने का प्रावधान है।
News Source: jagran.com

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